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अखरोट (Walnut) है बहुत सी बिमारियों का इलाज

शायद ही कोई ऐसा हो, जिसे अखरोट (Walnut) खाना पसंद न हों. जिसे अखरोट (Walnut) खाना पसंद न हों, उसे इसके लाभदायक गुणों के बारे में पता नहीं होगा. यह शरीर के लिए बहुत फायदेमंद होता है और इसमें कई गंभीर बीमारियों से लड़ने की क्षमता होती है.अखरोट

अखरोट (Walnut) है बहुत सी बिमारियों का इलाज

टी.बी. (यक्ष्मा) के रोग में – 3 अखरोट और 5 कली लहसुन पीसकर 1 चम्मच गाय के घी में भूनकर सेवन कराने से यक्ष्मा में लाभ होता है.

पथरी का इलाज – साबुत (छिलके और गिरी सहित) अखरोट (Walnut) को कूट-छानकर 1 चम्मच सुबह-शाम ठंडे पानी में कुछ दिनों तक नियमित रूप से सेवन कराने से पथरी मूत्र-मार्ग से निकल जाती है.
अखरोट को छिलके समेत पीसकर चूर्ण बनाकर रखें. 1-1 चम्मच चूर्ण ठंडे पानी के साथ प्रतिदिन सुबह-शाम खायें. इससे रोग में पेड़ू का दर्द और पथरी ठीक होती है.

बिस्तर पर पेशाब करना – प्राय: कुछ बच्चों को बिस्तर में पेशाब करने की शिकायत हो जाती है. ऐसे बाल रोगियों को 2 अखरोट और 20 किशमिश प्रतिदिन 2 सप्ताह तक सेवन करने से यह शिकायत दूर हो जाती है.

सफेद दाग – अखरोट (Walnut) के निरन्तर सेवन से सफेद दाग ठीक हो जाते हैं.

फुन्सियां – यदि फुन्सियां अधिक निकलती हो तो 1 साल तक रोजाना प्रतिदिन सुबह के समय 5 अखरोट सेवन करते रहने से लाभ हो जाता है.

जी-मिचलाना – अखरोट खाने से जी मिचलाने का कष्ट दूर हो जाता है.

मरोड़ – 1 अखरोट को पानी के साथ पीसकर नाभि पर लेप करने से मरोड़ खत्म हो जाती है.

बच्चों के कृमि (पेट के कीड़े) – कुछ दिनों तक शाम को 2 अखरोट खिलाकर ऊपर से दूध पिलाने से बच्चों के पेट के कीडे़ मल के साथ बाहर निकल जाते हैं.

अखरोट की छाल का काढ़ा 60 से 80 मिलीलीटर पिलाने से आंतों के कीड़े मर जाते हैं.

मस्तिष्क शक्ति हेतु – *अखरोट की गिरी को 25 से 50 ग्राम तक की मात्रा में प्रतिदिन खाने से मस्तिष्क शीघ्र ही सबल हो जाता है.
अखरोट खाने से मस्तिष्क की शक्ति बढ़ती है.”

बूढ़ों की निर्बलता – 8 अखरोट की गिरी और चार बादाम की गिरी और 10 मुनक्का को रोजाना सुबह के समय खाकर ऊपर से दूध पीने से वृद्धावस्था की निर्बलता दूर हो जाती है.

अपस्मार – अखरोट की गिरी को निर्गुण्डी के रस में पीसकर अंजन और नस्य देने से लाभ होता है.

नेत्र ज्योति (आंखों की रोशनी) – 2 अखरोट और 3 हरड़ की गुठली को जलाकर उनकी भस्म के साथ 4 कालीमिर्च को पीसकर अंजन करने से आंखों की रोशनी बढ़ती है.

कंठमाला – अखरोट के पत्तों का काढ़ा 40 से 60 मिलीलीटर पीने से व उसी काढ़े से गांठों को धोने से कंठमाला मिटती है.

दांतों के लिए – अखरोट की छाल को मुंह में रखकर चबाने से दांत स्वच्छ होते हैं. अखरोट के छिलकों की भस्म से मंजन करने से दांत मजबूत होते हैं.

स्तन में दूध की वृद्धि के लिए – गेहूं की सूजी एक ग्राम, अखरोट के पत्ते 10 ग्राम को एक साथ पीसकर दोनों को मिलाकर गाय के घी में पूरी बनाकर सात दिन तक खाने से स्त्रियों के स्तनों में दूध की वृद्धि होती है.

खांसी (कास) – अखरोट गिरी को भूनकर चबाने से लाभ होता है.
छिलके सहित अखरोट को आग में डालकर राख बना लें. इस राख की एक ग्राम मात्रा को पांच ग्राम शहद के साथ चटाने से लाभ होता है.

हैजा – हैजे में जब शरीर में बाइटें चलने लगती हैं या सर्दी में शरीर ऐंठता हो तो अखरोट के तेल से मालिश करनी चाहिए.

विरेचन (पेट साफ करना) – अखरोट के तेल को 20 से 40 मिलीलीटर की मात्रा में 250 मिलीलीटर दूध के साथ सुबह देने से मल मुलायम होकर बाहर निकल जाता है.

अर्श (बवासीर) होने पर – वादी बवासीर में अखरोट के तेल की पिचकारी को गुदा में लगाने से सूजन कम होकर पीड़ा मिट जाती है.

अखरोट के छिलके की राख 2 से 3 ग्राम को किसी दस्तावर औषधि के साथ सुबह, दोपहर तथा शाम को खिलाने से खूनी बवासीर में खून का आना बंद हो जाता है.

आर्त्तव जनन (मासिक-धर्म को लाना) – मासिक-धर्म की रुकावट में अखरोट के छिलके का काढ़ा 40 से 60 मिलीलीटर की मात्रा में लेकर 2 चम्मच शहद मिलाकर दिन में 3-4 बार पिलाने से लाभ होता है.
इसके फल के 10 से 20 ग्राम छिलकों को एक किलो पानी में पकायें, जब यह पानी आठवां हिस्सा शेष बचे तो इसे सुबह-शाम पिलाने से दस्त साफ हो जाता है.

प्रमेह (वीर्य विकार) – अखरोट की गिरी 50 ग्राम, छुहारे 40 ग्राम और बिनौले की मींगी 10 ग्राम एक साथ कूटकर थोड़े से घी में भूनकर बराबर मात्रा में मिश्री मिलाकर रखें, इसमें से 25 ग्राम प्रतिदिन सेवन करने से प्रमेह में लाभ होता है. ध्यान रहे कि इसके सेवन के समय दूध न पीयें.

वात रोग – अखरोट की 10 से 20 ग्राम की ताजी गिरी को पीसकर दर्द वाले स्थान पर लेप करें, ईंट को गर्मकर उस पर जल छिड़ककर कपड़ा लपेटकर उस स्थान पर सेंक देने से शीघ्र पीड़ा मिट जाती है. गठिया पर इसकी गिरी को नियमपूर्वक सेवन करने से रक्त शुद्धि होकर लाभ होता है.

शोथ (सूजन) – *अखरोट का 10 से 40 मिलीलीटर तेल 250 मिलीलीटर गौमूत्र (गाय के पेशाब) में मिलाकर पिलाने से सभी प्रकार की सूजन में लाभ होता है.
वात-जन्य सूजन में इसकी 10 से 20 ग्राम अखरोट की गिरी को कांजी में पीसकर लेप करने से लाभ होता है.

बूढ़ों के शरीर की कमजोरी – 10 ग्राम अखरोट की गिरी को 10 ग्राम मुनक्का के साथ रोजाना सुबह खिलाना चाहिए.

दाद – सुबह-सुबह बिना मंजन कुल्ला किए बिना 5 से 10 ग्राम अखरोट की गिरी को मुंह में चबाकर लेप करने से कुछ ही दिनों में दाद मिट जाती है.

नासूर – अखरोट की 10 ग्राम गिरी को महीन पीसकर मोम या मीठे तेल के साथ गलाकर लेप करें.

घाव (जख्म) – इसकी छाल के काढे़ से घावों को धोने से लाभ होता है.

नारू (गंदा पानी पीने से होने वाला रोग) – *अखरोट की खाल को जल के साथ महीन पीसकर आग पर गर्म कर नहरुआ की सूजन पर लेप करने से तथा उस पर पट्टी बांधकर खूब सेंक देने से नारू 10-15 दिन में गलकर बह जाता है.
अखरोट की छाल को पानी में पीसकर गर्मकर नारू के घाव पर लगावें.

कब्ज – अखरोट के छिलकों को उबालकर पीने से दस्त में राहत मिलती है.

दस्त के लिए – अखरोट को पीसकर पानी के साथ मिलाकर नाभि पर लेप करने से पेट में मरोड़ और दस्त का होना बंद हो जाता है.

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