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हरसिंगार (Nyctanthes Arbor-Tristis) मन को ही नहीं तन को भी शक्ति देता है ये पवित्र पौधा

हरसिंगार का वृक्ष भी मध्यम आकार का होता है. ये दस से बीस फीट तक ऊँचे होते हैं. इसके फूल अत्यंत सुंदर खुशबूदार व कोमल होते हैं. इसके बीज गोल होते हैं. जिनकी आकृती चपटी होती है. फूल इतने कोमल होते हैं की हवा से फूलों की चादर सी बिछ जाती है. इसके फूलों का डंठल पीला और फूल सफेद होते हैं. इस पेड के बहुत सारे गुण होते हैं.

इसके पुष्प रात को खिलते हैं. पूरी रात सुगंधी बिखेरता है. यह वृक्ष भोर होते ही अपने सभी फूल पृथ्वी पर बिखेर देता है . अलौकिक सुगंध में सराबोर इसके पुष्प केवल मन को ही प्रसन्न नहीं करते. तन को भी शक्ति देते हैं. हरसिंगार जिसे नाइट जैस्मिन (Night Jasmine) भी कहते हैं. एक सुन्दर झाड़ीनुमा छोटा पेड़ है. जिस पर सुन्दर व सुगन्धित फूल लगते हैं. हरसिंगार उन प्रमुख पेड़ों में से एक है. जिसके फूल ईश्वर की आराधना में महत्वपूर्ण स्थान रखते है.

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मन को ही नहीं तन को भी शक्ति देता है ये पवित्र पौधा – इस पौधे के फूल सिर्फ हमारे मन को ही नहीं प्रसन्न करते है. यह हमारे शरीर को भी शक्तिशाली बनाने में सहायक है.  आइये जानते है कैसे. इसके फूलों को छाया में सुखाकर पावडर कर लीजिये और फिर मिश्री मिलाकर खाली पेट लीजिए शारीरिक शक्ति का अदभुत विकास होगा.हरसिंगार (Nyctanthes Arbor-Tristis) मन को ही नहीं तन को भी शक्ति देता है ये पवित्र पौधा

हरसिंगार (Nyctanthes Arbor-Tristis) परिचय गुण तथा आयुर्वेदिक उपयोग

हरसिंगार (Nyctanthes Arbor-Tristis) के अन्य नाम – शेफालिका, पारिजात, शिवली, मल्लिका, स्वर्णमल्लिका और अंग्रेजी में इसे Night Jasmine कहते हैं.

हरसिंगार (Nyctanthes Arbor-Tristis) के गुण

इसके फूल, पत्ते और छाल का उपयोग औषधि के रूप में किया जाता है. यह लगभग पूरे भारत में पाया जाता है. इसके पत्तों में टेनिक एसिड, मैथिल सिलसिलेट और ग्लूकोसाइड होता है. ये द्रव्य औषधीय गुणों से भरपूर हैं. इसके पत्तों का सबसे अच्छा उपयोग सायटिका रोग को दूर करने में किया जाता है.

हरसिंगार (Nyctanthes Arbor-Tristis) के आयुर्वेदिक उपयोग

दाद खाज में– नाचनी के आटे में हरसिंगार के फूलों का रस मिला कर पेस्ट बना लें और फिर इस पेस्ट को लगायें इससे दाद, खाज, खुजली ठीक हो जाती है.

रूसी में – हरसिंगार के बीजों को पीस कर सिर में लगाने से रूसी मित जाती है.

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ज्वर में– हरसिंगार के पत्तों को पीस कर इसमें गुड़ मिला कर देने से बुखार ठीक हो जाता है.

गलगंड में– हरसिंगार के पत्तों को बांस के पत्तों के साथ पीस कर उसका लेप लगाने से लाभ होता है.

शरीर की अकड़न में- इसके पत्तों का रस निकालें इसमें अदरक का रस मिलाएं इसको गरम पानी के साथ पियें इससे शरीर की अकडन मिटती है.

साइटिका की बीमारी में हरसिंगार के प्रयोग – साइटिका (Sciatica) का तो इलाज ही यह पेड़ है. इसके दो तीन बड़े पत्तों का काढ़ा सवेरे शाम खाली पेट पीयें .

बवासीर में – बवासीर के लिए इसके बीज रामबाण औषधि की तरह काम करते हैं. इसके एक बीज का सेवन प्रतिदिन करने से बवासीर ठीक हो जाता है. या हारसिंगार के बीज 10 ग्राम तथा कालीमिर्च 3 ग्राम को मिलाकर पीस लें और चने के बराबर आकार की गोलियां बनाकर खायें. रोजाना 1-1 गोली गुनगुने जल के साथ सुबह-शाम खाने से बवासीर ठीक होती है. यदि गुदाद्वार में सूजन या मस्से की समस्‍या है तो हरसिंगार के बीजों का लेप बनाकर गुदे पर लगाने से लाभ मिलता है.

सूजन में में में हरसिंगार के प्रयोग – शरीर के किसी भी हिस्से में सूजन है तो इसकी पत्तियाँ पानी में उबालकर उससे झराई करें. सूजन पर इसके पत्तों को बांधें.

जोड़ों के दर्द में – जोड़ों का दर्द होने पर इसके पंचांग का काढ़ा पीजिए. 5 ग्राम पंचांग, 400 ग्राम पानी लेकर धीमी आंच पर पकाएं. जब एक तिहाई रह जाए तो खाली पेट पीयें .

खांसी में – इसकी दो पत्तियां +एक फूल +तुलसी के पत्ते. ये सब लेकर इसको एक गिलास पानी में उबालें और चाय की तरह पी लें. इससे पेट का जमा हुआ मल भी निकल जाएगा .

पेट में कीड़े –  पत्तों का रस लें. छोटा बच्चा है तो एक चम्मच और बड़ा व्यक्ति है तो दो चम्मच . सुबह खाली पेट थोडा पानी और चीनी मिलाकर लें. साल में कभी-कभी यह रस ले लें तो पेट में कीड़े होंगे ही नहीं.

पुराने बुखार में – पुराना बुखार हो या शरीर की टूटन हो तो, इसकी तीन ग्राम छाल, दो पत्तियां, 3-4 तुलसी की पत्तियां पानी में उबालकर सुबह शाम लें.

नोट – यह वृक्ष आसपास लगा हो खुशबू तो प्रदान करता ही है. साथ ही नकारात्मक उर्जा को भी भगाता है. इस उपयोगी वृक्ष को अवश्य ही घर के आसपास लगाना चाहिए. चीन और ताईवान जैसे देशों में तो इसके फूल पत्तों की हर्बल चाय पीते हैं. इसके दो पत्ते और चार फूल लेकर पांच कप चाय बना सकते हैं. बिना दूध की यह चाय स्फूर्तिदायक होती है.

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