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शिशु रोग की जानकारी तथा इनका घरेलू इलाज

शिशु रोग की जानकारी तथा इनका घरेलू इलाज – इस लेख में हम आपको शिशुओं में होने वाले विभिन्न रोगों की जानकारी दे रहे है. इन रोगों से किस प्रकार निजात पाई जा सकती है. इन रोगों से छुटकारा पाने के विभिन्न उपाय यहाँ पर दिए जा रहें है. तो चलिए जानते है इनके बारे में.शिशु रोग की जानकारी तथा इनका घरेलू इलाज

शिशु रोग की जानकारी तथा इनका घरेलू इलाज

अश्मरी रोग

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बाँस का छिलका, वरुण की छाल का क्वाथ शर्करा के साथ उपयोग करें.

श्लीपद रोग

शाखोटक (सिंहोर) की छाल का क्वाथमधु और दुग्ध के साथ पान करें.

पाद रोग नाशक

उड़द, मदर की पत्ती तथा दूध, तैल, मोम एवं सैंधव लवण का योग पाद रोग नाशक है.

मलबन्ध रोग

(1) सौंठ, काला नमक और हींग या (2) सौंठ के रस के साथ सिद्ध किया गया घी अथवा (3) इनका क्वाथ पीने से मलबन्ध दोष और तत्सम्बन्धी रोग नष्ट होते हैं.

गुल्मरोगी

(1) सर्जक्षार, चित्रक, हींग और अजमोद के रस के साथ या (2) विडंग और चित्रक के रस के साथ तक्र पान करें.

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विसर्परोग

(1) आँवला, परवल और मूँग के क्वाथ का घी के साथ सेवन करें. (2) सौंठ, देवदारु और पुननर्वा या बन्सलोचन का दूधयुक्त क्वाथ प्रयोग करें.

वमनकारक-उलटी कराना

वच और मैनफल के क्वाथ का जल.

झुर्रियों से मुक्ति

भृंगराज के रस में भावित त्रिफला सौ पल, बायविडंग और लोहचूर दस भाग एवं शतावरी, गिलोय और चिचक पच्चीस पल ग्रहण करके उसका चूर्ण बना कर घी, मधु और तेल के साथ चाटना चाहिये. इससे झुर्रियाँ नहीं होती और बाल नहीं पकते.

मधु और शर्करा के साथ त्रिफला का सेवन सर्व रोग नाशक है.

त्रिफला और पीपल का मिश्री, मधु और घी के साथ भक्षण पूर्वोक्त सभी फल-लाभ देता है.

जपा रोग

पुष्प को थोड़ा मसलकर जल में मिला लें उस जल को थोड़ी सी मात्रा में तेल में मिला देने पर तेल घृताकार हो जाता है. बिल्ली की गर्भ की झिल्ली की धूप से चित्र दिखलाई नहीं देता. फिर शहद की धूप देने से पूर्ववत दिखाई देने लगता है. पाकड़ की जड़, कपूर, जोंक और मेंढक का तेल पीसकर दोनों पैरों में लगाकर मनुष्य जलते हुए अंगारों पर चल सकता है.

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