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शमी (Prosopis Cineraria) परिचय गुण तथा आयुर्वेदिक उपयोग

शमी (Prosopis Cineraria) का वृक्ष विशाल वृक्ष होता है. इसका आयुर्वेदिक महत्व के साथ-साथ धार्मिक महत्व् भी है. कहा जाता है कि प्राचीन काल में ये प्रथा थी कि घर के आगे शमी के पेड़ का होना सुखदाई होता है. इसकी उपस्थिती से दुखों का नाश होता है. सुबह अगर इसके दर्शन हो जाएँ तो सारा दिन अच्छा गुजरता है. साथ ही यात्रा के दौरान अगर इसके फूल और पत्ते साथ में रखे जाएँ तो यात्रा मंगलमय होती है.

शुभ कार्यों तथा मंगल अवसरों पर इसका उपयोग होता है. इसकी लकड़ी हवन के लिए उत्तम मानी जाती है. कहीं-कहीं विजया दशमी पर इस की पूजा भी की जाती है.

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शमी (Prosopis Cineraria) परिचय गुण तथा आयुर्वेदिक उपयोग

ये माना जाता है कि यह भगवान श्री राम का प्रिय वृक्ष था. लंका पर आक्रमण से पहले उन्होंने इस वृक्ष की पूजा करके उससे विजयी होने का आशीर्वाद प्राप्त किया था. आज भी कई स्थानों पर ‘रावण दहन’ के बाद घर लौटते समय शमी के पत्ते स्वर्ण के प्रतीक के रूप में एक दूसरे को बाँटने की प्रथा हैं. इसके साथ ही कार्यों में सफलता मिलने कि कामना की जाती है. इसके पत्तों और इमली के पत्तों में समानता पाई जाती है. प्राय: इसके फूल रंग विरंगे छोटे-छोटे रूई के समान कोमल होते हैं.

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इस (Prosopis Cineraria) वृक्ष के बारे में महाभारत में भी वर्णन मिलता है. अपने 12 वर्ष के वनवास के बाद एक साल के अज्ञातवास में पांडवों ने अपने सारे अस्त्र शस्त्र इसी पेड़ पर छुपाये थे. जिसमें अर्जुन का गांडीव धनुष भी था. कुरुक्षेत्र में कौरवों के साथ युद्ध के लिये जाने से पहले भी पांडवों ने शमी के वृक्ष की पूजा की थी. उससे शक्ति और विजय प्राप्ति की कामना की थी. तभी से यह माना जाने लगा है. जो भी इस वृक्ष कि पूजा करता है. उसे शक्ति और विजय प्राप्त होती है.

शमी (Prosopis Cineraria) परिचय गुण तथा आयुर्वेदिक उपयोग

शमी (Prosopis Cineraria) के गुण

ये शीतल कड़वे होते हैं. ये कुष्ठ, अतिसार, श्वांस, कफ, भ्रम, क्रमी आदि का नाश करता है. वहीं इसके फल तीखे पित्त्कारी, केशनाशक होते हैं. इसकी अन्य जाती छोटी होती है, छोटी शमी के फल मीठे होते हैं.

शमी (Prosopis Cineraria) को कई नामों से भी जाना जाता है – सफेद कीकर, खेजडो, समडी, शाई, बाबली, बली, चेत्त आदि.

शमी (Prosopis Cineraria) के आयुर्वेदिक उपयोग

फोड़ों में- फोड़े फुंसी होने पर सूखी शमी की लकड़ी को घिस कर लगाने से जल्द ही ठीक हो जाते हैं.

गरमी में- इसके पत्तों के रस को जीरा या सक्कर के साथ पीने से ठंडक आती है.

खाज पर- इसके पत्तों को दही के साथ पीस कर लगाने से दाद, खाज, ठीक हो जाते हैं.

पेशाब के साथ धातु आने पर- दूध के साथ शमी के फूलों को गरम करें तत्पश्चात ठंठा होने र इसमें जीरे का चूर्ण मिलाएं. इसे दिन में दो बार पीने से बहुत लाभ होता है.

सांप के विष पर- इसके पत्तों के रस के साथ नीम के पत्तों का रस पिलाने से जहर का असर नहीं होता है.

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