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लसोड़ा (Cordia Dichotoma) अतिसार कालेरा तथा दंत रोग का दुशमन

लसोड़ा (Cordia Dichotoma) अतिसार कालेरा तथा दंत रोग का दुशमन – विशाल पेड़ों में इसकी भी गिनती होती है. इसके पत्ते पान के पत्तों के समान ही पाचक और चिकने होते हैं. इस कारण गुजरात की तरफ लोग इन का प्रयोग पान के पत्तों की जगह करते हैं. इनकी दो जातियां ज्यादा देखी जाती हैं. 1- लेमड़ा 2- लसोड़ा (Cordia Dichotoma) इसकी लकड़ी मजबूत और चिकनी होती है. इमारत बनाने के काम और फर्नीचर के काम इसके तख्ते लाये जाते हैं. बंदूक के कुंडे बनाने में भी इसका उपयोग किया जाता है.

इसके फल सुपारी की तरह ही मध्यमकार एवं व्रतीय होते हैं. कच्चे फल सब्जी के काम और पके फल फल की तरह खाने के काम आते हैं. पकने पर ये फल मीठे और स्वादिष्ट होते हैं. इसके अंदर से गोंद की तरह लसीला पदार्थ निकलता है. जो स्वाद में मीठा और स्वादिष्ट होता है. छोटे पेड़ के फल छोटे होते हैं. साथ ही इसमें चिकना पदार्थ नहीं निकलता है. इसे गोंदी, निसोरा, गोधरी, भेनकर, शेलवेट आदि कहते हैं. इसके फल रक्तदोष और कफ का नाश करते हैं.लसोड़ा (Cordia Dichotoma) अतिसार कालेरा तथा दंत रोग का दुशमन

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लसोड़ा (Cordia Dichotoma) अतिसार कालेरा तथा दंत रोग का दुशमन

लसोड़ा (Cordia Dichotoma) के अन्य नाम

गोंदी, निसोरा, गोधरी, भेनकर, शेलवेट

लसोड़ा (Cordia Dichotoma) के आयुर्वेदिक उपयोग

अतिसार में- लसोड़े की छाल को पानी में घिस कर पिलाने से अतिसार में लाभ होता है.

कालेरा में- चने के क्षार में लसोड़ा की छाल को पीस कर पिलाने से कालेरा में लाभदायक होता है.

दंत रोग में- इसकी छाल का काढा बना कर कुल्ला करने से दांतों के रोग में लाभ होता है.

स्वास्थवर्धक फूल- इसके फूलों को सुखा कर उस का चूर्ण बना लें और इस को शक्कर की चाश्नी में मिला कर लड्डू बना लें. और रोज खाएं इससे शरीर स्वस्थ बनता है.

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