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रीठा (Sapindus Mukorossi) परिचय गुण तथा आयुर्वेदिक उपयोग

रीठा (Sapindus Mukorossi) – भारत की भूमी अनेकों जड़ी  बूटियों एवं ऐसे पौधों से भरी पड़ी है. जिन का हम सामान्य जनजीवन में प्रयोग कर सकते हैं. ईश्वर ने धरती पर सब कुछ हमारी जरूरत के अनुसार ही बनाया है. लेकिन आधुनिकता की अंधी दौड़ में हम अपनी पुरातन अभ्यता को भूल ही गए हैं.

आज इसी का परिणाम है की जो चीजें हमें प्रक्रती प्रदत्त हैं. जो हमें सुलभ और सस्ती मिलती हैं. हम उन का प्रयोग न करके कृत्रिम चीजों का प्रयोग करते हैं. जो महंगे होने के साथ-साथ स्वभाब से भी अच्छे नहीं होते हैं.रीठा

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रीठा (Sapindus Mukorossi) के वृक्ष भारत के प्राय: अभी इलाकों में पाए जाते हैं. यह वृक्ष आकार में काफी बड़े होते हैं. इसके पत्ते गूलर के पत्तों से थोड़े बड़े होते हैं. यह पेड़ साधारण होने के साथ गुणों से भरा होता है. साबुनों की अपेक्षा रीठा ज्यादा लाभ दायक होता है. शैम्पू की जगह रीठा (Sapindus Mukorossi) बालों के लिए ज्यादा श्रेष्ठ होता है.

रीठा (Sapindus Mukorossi)  परिचय गुण तथा इसके आयुर्वेदिक उपयोग

रीठा (Sapindus Mukorossi)  के गुण

रीठा (Sapindus Mukorossi) के फल छोटे नीबू के आकार के होते हैं. कच्चे फल हरे और पक कर काले हो जाते हैं. इन फलों के अंदर सख्त गोल बीज होता है. फलों के गूदे से एक प्रकार का रस निकलता है जो अत्यंत झाग देता है इससे नहाने से बालों और त्वचा में चमक आती है और त्वचा के रोम छिद्र खुल जाते हैं.

प्राचीन काल में रीठे के बीज गले में बाँधने से नजर नहीं लगती है. इसी लिए लोग गले में इसके बीजों की माला बना कर पहनते थे. रीठे के पत्तों को पारे में पीसने से एक गोली बन जाती है. जो बर्तन या चांदी के गहने चमकाने के काम आती है.

रीठे और आवला को मिला कर सिर धोने से बाल हमेशा काले, घने और चमकदार बने रहते हैं. रीठे के घोल में कपड़े धोने से मैले कपड़े भी एक दम साफ हो जाते हैं. रीठे का प्रयोग कई प्रकार की बीमरियों में औषधी के रूप में किया जाता है.

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रीठा (Sapindus Mukorossi)  के अन्य नाम

इसे कई नामों से जाना जाता है जैसे अरिष्ट, अरीठा, रीठा (Sapindus Mukorossi), करंज, अतल, कंकुद, बुन्दक.

रीठा (Sapindus Mukorossi)  के आयुर्वेदिक उपयोग

पैरों में जलन होने पर- धुप में नंगे पैर चलने से या किसी और कारण से हुयी पैरों की जलन में रीठे का फैन मलने से जलन कम हो जाती है.

दस्त और उल्टी लगने पर- रीठे के फैन को निकाल कर हाथ और पैरों पर मलने से तथा कुछ देर के अन्तराल में पिलाने से आराम आता है.

कफ बढ़ने पर- सर्दी में कफ बढ़ने से रीठे के पानी का सेवन करने से कफ कम हो जाता है और छाती में जमे कफ को रीठे की छाल का काढ़ा बना कर पीने से यह फट कर निकल जाता है.

दिमांगी बीमारी में- दिमांगी बीमारी होने पर काली मिर्च को रीठे के पानी में पीस के नाक में डालना चाहिए.

बिच्छू के विष पर- एक रीठे के छिलके को गुड़ में पीस कर उसकी गोलियां बना कर एक गोली खा कर ठंडा पानी पियें थोड़ी देर बाद एक गोली गरम पानी से लें फिर तीसरी गोली ठंडे पानी से लें ऐसा करने से विष जल्दी उतर जाता है.

नहारू  होने पर– रीठे के बीज को हिंग के साथ कूट कर गर्म करके बाँधने से आराम आता है.

जानवरों को सांप काटने पर- रीठे का आधा किलो फैन और आधा किलो पानी मिला के पिलाने और काटे हुए स्थान पर रीठे का फैन लगाने से विष उतर जाता है.

दौरा पड़ने पर- रीठे के पानी को नाक में डालने से दौरा ठीक हो जाता है. और साथ ही रीठे को जला कर उसकी धूमनी देने से भी आराम आता है.

प्रसूती के समय – उत्पन्न परेशानी में- प्रसूती के समय गर्भ के बाहर न निकलने पर रीठे की छाल को कूट कर उसकी बत्ती बना कर योनी  मार्ग में रखने से प्रसूती आराम से हो जाती है.

नोट- सभी प्रकार के विष में रीठे का पानी नाक व आख में डालने से लाभ होता है.

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