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मौलसिरी (Maulasiree) परिचय गुण तथा आयुर्वेदिक उपयोग

मौलसिरी (Maulasiree) प्राय देश के हर भाग में पाया जाता है. सामान्यतया: इसे बागों में देखा जाता है. इसके पेड़ तीस से चालीस फिट ऊँचे होते हैं. पत्ते सगं व चिकने होते हैं. इनकी संरचना देखने में झोपडी के आकर की होती है. इस पेड़ पर पतझड़ का असर न के बराबर होता है.

इसका वृक्ष हमेशा हर भरा रहता है. इसके पत्ते के किनारे लहरदार होते हैं. फूल खुशबूदार होते हैं. फल एक इंच लम्बे चिकने होते हैं. ये हरे होते हैं. पकने पर पीले हो जाते हैं. इनके अंदर बीज होते हैं. फूल आने का समय होता है. ग्रीष्म से सर्द ऋतू तक उसके बाद फल आना सुरू होता है. इसके फूलों की सुगंध से पूरा वातावरण शुद्ध हो जाता है.मौलसिरी (Maulasiree) परिचय गुण तथा आयुर्वेदिक उपयोग

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मौलसिरी (Maulasiree) परिचय गुण तथा आयुर्वेदिक उपयोग

मौलसिरी (Maulasiree) के गुण

इससे इत्र बनाया जाता है. इसकी लकड़ी मजबूत होती है. रसायनिक के आधार पर इसके बीज में सैनोनिन और तेल होता है. छाल में टैटिन, मोम, रंजक, रख एवं रबड़ होता है. फूल में उडनशील तेल फल में शर्करा होती है. इसके फल कशय एवं मधुर होते हैं. इसका रस कसैला तीखा होता है.

मौलसिरी (Maulasiree) को कई नामों से जाना जाता है– बकूल, भोरसली, ब्कूली, ओबरी आदि.

मौलसिरी (Maulasiree) के आयुर्वेदिक उपयोग

दंत रोग में-

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दांत के रोग में इसका उपयोग लाभदायक होता है. दांत हिलते हों, मसूड़े ढीले पड  गये हों, मुखपाक हो गया हो तो इसकी छाल व् कच्चे फल को चबाना चाहिए साथ ही इसकी छाल का काढ़ा बना कर कुल्ला करने से हिलते दांत और मसूड़े सुद्र्ण हो जाते हैं.

मुह में सूजन आजाने पर-

इसकी छाल इमली और खैर की छाल को मिला कर उवाल लें फिर उससे 10-15 बार कुल्ला करने से मुह की सूजन कम हो जाती है.

गर्मी पर-

शरीर में ज्यादा गर्मी होने पर 10 फलों का रोजाना सेवन करने पर गर्मी शांत हो जाती है.

पेशाव की समस्या में

पेशाब की समस्या या  पेशाब में जलन में मौलसिरी के बीस बाईस पके फल को ढाई सौ ग्राम पानी में मसल कर और फिर उसमे पचास ग्राम शक्कर डाल कर छान ले इस शरबत को पीने से घंटे दो घंटे के बाद पेशाब आना साफ़ हो जायेगा .

पथरी में–

इसके  फलों का  रस का सेवन दो माह तक करें .

दिल के रोगों में–

इसके फूलों की माला का अलंकारण दिल के रोगों में अत्यंत फायदेमंद होता है . साथ ही इसके छाल  के काढ़े का निमियत सेवन भी फ़ायदेमंद होता है .

खांसी में–

इसके फूलों को रात्रि में पानी में भिगो कर रख दे दुसरे दिन सुबह पी ले इस विधि के नियमित सेवन से खांसी 6-7 दिन में ठीक हो जाती है.

अतिसार पर–

इसके बीजों को ठन्डे पानी में घिसकर पीने से अतिसार में आराम मिलता है. साथ ही पुराने आवं में पके फल खाना फायदेमंद है.

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