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मुलहठी (Glaisiraija Glibra) के आयुर्वेदिक तथा औष्धिय गुण

गले में खराश हो या खांसी, मुलहठी (Glaisiraija Glibra) चूसने से इसमें राहत मिलती है. इसके अलावा भी मुलहठी में कई ऐसे गुण हैं, जो शायद आप पहले नहीं जानते होंगे. जानिए इससे आपको किस प्रकार लाभ पहुंचा सकती है. यह बहुत गुणकारी औषधि है. मुलहठी (Glaisiraija Glibra) के प्रयोग करने से न सिर्फ आमाशय के विकार बल्कि गैस्ट्रिक अल्सर के लिए फायदेमंद है. इसका पौधा 1 से 6 फुट तक होता है. यह स्‍वाद में मीठी होती है इसलिए इसे यष्टिमधु भी कहा जाता है. असली मुलेठी अंदर से पीली, रेशेदार एवं हल्की गंधवाली होती है. सूखने पर इसका स्‍वाद अम्‍लीय हो जाता है.

मुलहठी (Glaisiraija Glibra) की जड़ को उखाड़ने के बाद दो वर्ष तक उसमें औषधीय गुण विद्यमान रहते हैं. इसका औषधि के रूप में प्रयोग बहुत पहले से होता आया है. मुलेठी (Glaisiraija Glibra) पेट के रोग, सांस संबंधी रोग, स्तन रोग, योनिगत रोगों को दूर करती है. ताजी मुलहठी में पचास प्रतिशत जल होता है, जो सुखाने पर मात्र दस प्रतिशत ही शेष रह जाता है. ग्लिसराइजिक एसिड के होने के कारण इसका स्वाद साधारण शक्कर से पचास गुना अधिक मीठा होता है. आइए हम आपको मुलेठी (Glaisiraija Glibra) के गुणों के बारे में बताते हैं.

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मुलहठी (Glaisiraija Glibra) के आयुर्वेदिक तथा औष्धिय गुण

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मुलहठी (Glaisiraija Glibra) के आयुर्वेदिक तथा औष्धिय गुण

  1. इस को काली-मिर्च के साथ खाने से कफ ढीला होता है. सूखी खांसी आने पर यह खाने से फायदा होता है. इससे खांसी तथा गले की सूजन ठीक होती है.
  2. अगर मुंह सूख रहा हो तो यह बहुत फायदा करती है.
  3. इसमें पानी की मात्रा 50 प्रतिशत तक होती है. मुंह सूखने पर बार-बार इसे चूसें. इससे प्‍यास शांत होगी.
  4. गले में खराश के लिए भी इस का प्रयोग किया जाता है. मुलहठी अच्‍छे स्‍वर के लिए भी प्रयोग की जाती है.
  5. यह महिलाओं के लिए बहुत फायदेमंद है. इस का एक ग्राम चूर्ण नियमित सेवन करने से स्त्रियां, अपनी, योनि, सेक्‍स की भावना, सुंदरता को लंबे समय तक बनाये रख सकती हैं.
  6. इस की जड़ पेट के घावों को समाप्‍त करती है, इससे पेट के घाव जल्‍दी भर जाते हैं. पेट के घाव होने पर मुलहठी की जड़ का चूर्ण इस्‍तेमाल करना चाहिए.
  7. यह पेट के अल्‍सर के लिए फायदेमंद है. इससे न केवल गैस्ट्रिक अल्सर वरन छोटी आंत के प्रारम्भिक भाग ड्यूओडनल अल्सर में भी पूरी तरह से फायदा करती है. जब इस का चूर्ण ड्यूओडनल अल्सर के अपच, हाइपर एसिडिटी आदि पर लाभदायक प्रभाव डालता है. साथ ही अल्सर के घावों को भी तेजी से भरता है.
  8. खून की उल्टियां होने पर दूध के साथ मुलहठी का चूर्ण लेने से फायदा होता है. खूनी उल्‍टी होने पर मधु के साथ भी इसे लिया जा सकता है.
  9. हिचकी होने पर मुलहठी के चूर्ण को शहद में मिलाकर नाक में टपकाने तथा पांच ग्राम चूर्ण को पानी के साथ खिला देने से लाभ होता है.
  10. यह आंतों की टीबी के लिए भी फायदेमंद है.

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