आप यहाँ पर हैं

बांस (Bamboo) परिचय गुण तथा आयुर्वेदिक उपयोग

भारत के हरेक प्रान्त में बांस (Bamboo) पाया जाता है. कोंकण तथा विहार के पूनीर्यां जिले में बांस काफी मात्रा में पैदा होता है. जंगलों तथा पहाड़ी इलाकों में भी बांस (Bamboo) बहुत पाया जाता है. समतल भूमी पर होने वाला बांस अपेक्षाकृत काफी मोटे और लम्बे होते हैं. वहीं पहाड़ी क्षेत्रों के बांसों की लम्बाई और गोलाई कम होती है. वैसे दोनों ही मजबूत होते हैं.

समतल भूमी पर होने बाले बांस (Bamboo) चालीस से पचास फीट तक लम्बे होते हैं. इसकी लकड़ी अत्यधिक लम्बी और लचीली होती है. इसके पत्ते लम्बे और नुकीले होते हैं. इसके बीज गेहूं के दाने जैसे होते हैं.चालीस पचास साल के बाद इस पे बीज आते  हैं. इसकी पैदा बार खुद पे खुद बढती है. इस के आस-पास के अंकुरण से इसकी पैदा बार बढती चली जाती है. इसी तरह अगर एक सूख जाये तो आठ दस सूख जाते हैं.

loading...

बांस

बांस (Bamboo) परिचय गुण तथा आयुर्वेदिक उपयोग

बांस (Bamboo) के गुण

इस से बहुत सारी वस्तुएं बनाई जाती हैं. जिन का हम अपने जीवन में रोज प्रयोग करते हैं. जैसे- टोकरी, चटाई. सूप, पंखे, कुर्सीयों, कोच, पलंग आदि तो बनाये ही जाते हैं. इसके अलाबा निर्धन वर्ग इन का घर बनाने के लिए प्रयोग करता है. सामन्यतय: इसे हरेक घर में खाट के पायों और लकड़ी की सीड़ी के रूप में देखा जाता है.

loading...

इसको कई अन्य नामों से जाना जाता है – वंश, वेणु, बेल, चिवा, विदिरू,गला, एला, मुंगिल आदि भी कहते हैं.

बांस (Bamboo) के आयुर्वेदिक उपयोग

मूत्र रोग में- पेशाब साफ न आने पर कंकोल, बांस, इलायची इन तीनों को साथ लेकर पीस लें और कपड़े में छान लें. अब इस को दूध व मिश्री के साथ लें.

शक्ती व्रद्धी में– पीपल, दालचीनी, बांस, तथा इलायची इन सब को लेकर पीस लें और इस चूर्ण को सेवन करें इससे शक्ती के साथ-साथ क्षय, जीर्ण, और खांसी आदि में भी बहुत लाभकारी होता है.

खांसी में- इस के चूर्ण को शहद के साथ दिन में दो बार लें इससे खांसी बिलकुल ठीक हो जायेगी. और बच्चों को जब खांसी हो तो इस की गांठ को घिस कर पिलाने से लाभ होता है.

मूत्त्राधात में- इस की राख को चावल के पानी में और शहद में मिला कर चाटने से लाभ होता है. साथ ही इस के सूखे और हरे पत्ते बराबर ले कर इन का काढ़ा बना कर पीने से बहुमूत्र रोग में लाभकारी होता है.

शीतलता के लिए– दूध और  मिश्री के साथ इस का चूर्ण लेने से शरीर की गर्मी शांत होती है.

पारा खालेने पर- इस के पत्तों का रस निकाल कर शहद के साथ देने से लाभ होता है.

You May Be Interested

Leave a Reply