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तेज पत्ता (Bay Leaf) मसाले के साथ बहुत से रोगों की असरकारक औष्धि भी है

तेज पत्ता (Bay Leaf) मसाले के साथ बहुत से रोगों की असरकारक औष्धि भी है – इसके पौधे छोटे प्राय तीन फीट तक होते हैं. इस पर पतझड़ का असर नहीं होता है. यह पौधा हमेशा हर भरा रहता है. इसकी छाल पतली, खुरदरी हरे रंग की या फिर भूरे रंग की होती है. इसके अपक्व फल को काला नाग केशर भी कहा  जाता है. इसके त्वक को दाल चीनी के नाम से जाना जाता है.

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सिंह द्वीप की दालचीनी अपेक्षाकृत अधिक अच्छी होती है. इसके पत्तों से निकला गया तेल सुगन्धित होता है. इसके पत्ते तेज पत्ते (Bay Leaf) के रूप में और त्वक दालचीनी के रूप में हर जगह मसाले के रूप में प्रयोग किये जाते हैं. इनको ओषधियों के रूप में भी काम में लाया जाता है.

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तेज पत्ते के अन्य नाम – तपालपत्र, पत्रनामक, तेजपत्र, पत्रक, तेजपत्ता आदि अनेक नामों से जाना जाता है.तेज पत्ता (Bay Leaf) मसाले के साथ बहुत से रोगों की असरकारक औष्धि भी है

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तेज पत्ता (Bay Leaf) मसाले के साथ बहुत से रोगों की असरकारक औष्धि भी है

तेज पत्ते (Bay Leaf) के औष्धिय उपयोग

कफ होने पर- कफ होने पर तेज पत्तों के रस को निकाल कर पीने से कफ निकल जाता है.

मुह की दुर्गन्ध में- मुह में बदबू आने पर सूखे तेज पत्तों को मुह में रख कर चूसने से बदबू आना बंद हो जाता है.

चर्म रोग में- चर्म रोग व नाड़ी शूल पर तेजपत्र की छाल को पीस कर इसका लेप करने से चर्म रोग और नाड़ी शूल में लाभ होता है.

दंत शूल में- खोखले दांत व दंत शूल में दो-तीन बूंद दाल चीनी का तेल रूई में भिगो कर दांत के पास रखने से दर्द में आराम मिलता है.

लिंग की स्थूलता पर- लिंग की स्थूलता पर दाल चीनी के तेल की मालिस या दालचीनी को पीस कर इसका लेप लगाने से लाभ होता है.

बिच्छू या सांप के काटने पर- इसके तेल को तुरंत दंशित स्थान पर लगाने से दर्द व एंठन कम होती है. और विष का असर भी खत्म हो जाता है.

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