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तेंदू (Persimmon) का परिचय गुण तथा आयुर्वेदिक उपयोग

तेंदू (Persimmon) पेड़ अत्यंत ऊँचे होते हैं. पत्ते गोलाई लिए हुए शीशम के पत्तों की तरह होते हैं. इसके अंदर सार काला और वजनदार होता है. इसको कंही-कंही आबनूस भी कहते हैं. इसका फल नीबू की तरह गोल और सोभायमान होता है. पकने पर यह पीले रंग का हो जाता है. इसके सेवन से ह्रदय खोखला हो जाता है. कफ की शिकायत हो जाती है. कण्ठ सूखने लगता है. लेकिन ऐसी जानकारी होने के वावजूद भी न तो इनका निर्माण रुका है न बिकना.

तेंदू के पत्तों का व्यवसायिक रूप से बहुत महत्व् है. इन की बीड़ी बनाई जाती है. हालांकी इसके सेवन से ह्रदय खोखला हो जाता है. कफ की शिकायत हो जाती है. कण्ठ सूखने लगता है. लेकिन ऐसी जानकारी होने के वावजूद भी न तो इनका निर्माण रुका है न बिकना. अब तो इन का व्यापार इतना वढ गया है. की हर गरीब आदमी इसका सेवन खूब करता है. इन से बहुत सी शारीरिक हानी होने के बाद भी लोग इन को बढ़ावा दे रहे हैं.

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तेंदू (Persimmon) का परिचय गुण तथा आयुर्वेदिक उपयोग

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तेंदू (Persimmon) का परिचय गुण तथा आयुर्वेदिक उपयोग

तेंदू (Persimmon) को अन्य नामों से भी जाना जाता है– तीबरा, तुमरी, जगलभर आदि.

तेंदू तेंदू (Persimmon) के आयुर्वेदिक उपयोग

तेंदू का कच्चा फल-

ग्राही, वातकारक, शीतल, हल्का, लघु, मल, स्तम्भक, अरूचिकर, एवं कड़वा होता है.

पके फल-

मधुर, भारी, पित्त, प्रमेह, कफ और गैस का नाश करते हैं.

छाल-

पित्त का नाश करती है.

घाव पर-

इसके फल के रस को कई जगह घाव पर लगाया जाता है. इससे घाव जल्द भर जाता है.

दस्त में-

इसके बीजों के सेवन से दस्त बंद हो जाते हैं.

सूजन को रोके-

यदि खिन से गिरने पर नसों में चोट आये तो तेंदू के फलों का रस लगाने से सूजन नहीं आती है. ये सूजन को रोक के रखता है.

जूएँ मारने के लिए-

इसकी छाल को हाय के मूत्र में पीस कर बालों में लगाने से जू मर जाते हैं.

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