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टेसू (Butea Monosperma) परिचय गुण तथा आयुर्वेदिक उपयोग

टेसू का पेड़ छोटा होता है. इसके पत्ते चौड़े और चिकने होते हैं. इन का उपयोग दौने बनाने के काम आता है. फूलों में केसर के समानता होती है. इसके फूलों का रंग हल्के हरे रंग का होता है. फूलों का प्रयोग रंग बनाने में किया जाता है.

इसके फूल बहुत ही आकर्षक होते हैं. इसके आकर्षक फूलो के कारण इसे “जंगल की आग” भी कहा जाता है. प्राचीन काल ही से होली के रंग इसके फूलो से तैयार किये जाते रहे है. समस्त भारत मे इसे जाना जाता है.टेसू (Butea Monosperma) परिचय गुण तथा आयुर्वेदिक उपयोग

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टेसू (Butea Monosperma) परिचय गुण तथा आयुर्वेदिक उपयोग

टेसू (Butea Monosperma) के अन्य नाम – पलास, केसू, ठाक, कांकरिया,धारा, खाखरो, चेटू आदि.

टेसू (Butea Monosperma) के गुण

इसकी लकड़ी कमजोर वह लचीली होती है. इस कारण इसका प्रयोग सिर्फ इंधन के लिए किया जाता है. ये अर्श, कफ, गुल्म आदि का नाश करता है. इसके बीज कफ, क्रमी का नाश करते हैं. इसकी कोमल कोपलें गैस को दूर करती हैं.

टेसू (Butea Monosperma) के आयुर्वेदिक उपयोग

कमजोरी में- टेसू के गोंद को बारीक पीस कर घी में तल लें. जब ये फूल जाये तो इसमें शक्कर, बादाम, पिस्ता, छुआरा, चिरौंजी आदि डाल कर सेवन करने से कमजोरी दूर होती है. एवं शक्ती का संचार होता है. साथ ही इसकी जड़ का काढ़ा बना कर इसे मिश्री या शहद के साथ लेने से भी शक्ती आती है. इससे आखों की रोशनी भी बढती है.

कफ की समस्या मैं- इसके फूलों को पानी में उवाल कर इससे छाती सेकने पर आराम मिलता है. कफ छटने लगता है. साथ ही इसके फूलों को सरसों के तेल में पका कर इस तेल से छाती की मालिस और सिकाई करने से भी कफ पतला हो कर निकल जाता है.

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पेडू की सूजन पर– इसके फलों को उवाल कर पेडू पर बांधने से सूजन कम होती है. साथ ही पेशाब का रुक-रुक कर आना और जलन भी ठीक होती है.

मासिक धर्म की अनियमितता- मासिक धर्म अनियमित या रुक जाने पर टेसू के फल और गुलाब के फूल को पानी या घी के साथ लेना चाहिए साथ ही फिटकरी को पोटली में बांध कर थोडा गीला करके योनी में 2-3 घंटे के लिए रखना चाहिए इससे मासिक धर्म नियम से आने लगता है.

क्रमी पर- बायबडिंग व इसके बीज दो ग्राम के अनुपात में ले कर इन का चूर्ण बना लें. इस चूर्ण को नीबू के रस या शहद के साथ खाएं इससे कीड़े नष्ट हो जाते हैं.

फुंसियों पर- फुंसी होने पर इसने फल को नीम के फल के साथ घिस कर लगाने से फुंसियाँ ठीक हो जाती हैं.

कान में कीड़ा जाने पर- इसके अंकुरों का रस कान में डालने से कीड़ा मर जाता है और कान साफ हो जाता है.

बिच्छू के विष पर- इसके फक को आक के दूध में फिगो कर छाया में सुखा लें. इसके बाद इसकी गोलियां बना लें इस गोली को काटे हुए स्थान पर लगाने से झर का असर उतर जाता है.

खांसी में- इसके पत्तों के डंठलों को मुह में रख कर चूसने से खांसी ठीक हो जाती है.

सर्प दंश में- सांप के काटने पर इसकी जड़ को पानी में घिस कर देने से विष का असर नहीं होता है.

गलकण्ठ पर- चावल की धोवन में इसकी जड़ को पीस कर कान के पीछे लगाने से आराम आता है.

दाद खाज में- इसके फल को नीबू के रस में पीस कर गरम करके लेप करने से दाद, खाज ठीक हो जाती है.

गर्भ धारण में- जब गर्भ धारण न हो तो टेसू के फल को जला कर उसकी रख को पानी में मिला कर पीना लाभदायक होता है.

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