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गिलोय (Tinospara Cordifolia) परिचय गुण तथा आयुर्वेदिक उपयोग

गिलोय (Tinospara Cordifolia) का परिचय – आयुर्वेद में सर्व श्रेष्ठ बेल गिलोय (Tinospara Cordifolia) बहुत से रोगों का उपचार करने में उपयोग की जाती है. इसीलिए माना जाता है कि गिलोय व्यक्ति को लम्बी उम्र प्रदान करती है. गिलोय  की मुख्य बात ये है कि इसकी बेल हर जगह आसानी से मिल जाती है. जिसकी वजह से इसको आसानी से प्राप्त किया जा सकता है.

इसके पत्ते पान के पत्ते की तरह होते है और इसके हर हिस्से को किसी न किसी रोग के इलाज के लिए उपयोग किया जाता है. इसके इतने सारे लाभों और गुणों के कारण ही इसे सर्व श्रेष्ठ बूटी या बेल माना जाता है. अगर आपके आसपास कोई नीम का पेड़ है तो आप उसकी जड़ में गिलोय  को अवश्य बो दें. और उसका लाभ उठायें. ध्यान रहें आयुर्वेद में सिर्फ उसी गिलोय (Tinospara Cordifolia) को सर्वश्रेष्ठ माना जाता है जो नीम पर लिपटी हो. आज हम आपको गिलोय के ऐसे ही चमत्कारी गुण के बारे में आपको बताने जा रहें है.

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अन्य भाषाओँ में गिलोय के नाम

संस्कृत -गुडूची। हिन्दी-गिलोय। मराठी-गुलवेल। गुजराती-गलो। बंगला-गुलंच।तैलूगु– तिप्पतोगे।तामिल-शिण्डिलकोडि कन्नड़– गरुड़बेल। पंजाब-गिलो ।कोकण-गरुड़वेल। गोआ-अमृतबेल। करनाटकी-अमरदवल्ली। फारसी-गिलोई। इंगलिश टिनोस्पोरा (Tinospara).। लैटिन-टिनोस्पोरा कार्डो फोलिया (Tinospara cordifolia).गिलोय

गिलोय (Tinospara Cordifolia) परिचय गुण तथा आयुर्वेदिक उपयोग

गिलोय के आयुर्वेदिक औष्धिय गुण

बांझपन दूर करे  (Remove Infertility ) : स्त्री का माँ बनना उसका सबसे बड़ा सौभाग्य माना जाता है क्योकि माँ बनाने पर वो अपने शरीर के एक हिस्से को अपने शिशु के रूप में पाती है. किन्तु वो स्त्री जिनको संतान नही हो पाती या बाँझ होती है उनका दुःख सिर्फ वो ही समझ सकती है. किन्तु गिलोय (Tinospara Cordifolia) में ऐसे गुण होते है जिससे बांझपन से निवारण पाना संभव होता है. इसके लिए नारी को प्रतिदिन गिलोय और अश्वगंधा को 1 ग्लास दूध में अच्छी तरह पकाकर उसे ग्रहण करना चाहियें. इस तरह उन्हें जल्द ही बाँझपन से मुक्ति मिलती है. इसके साथ ही उसका गर्भाशय भी मजबूत होता है ताकि उसे बच्चे के जन्म के समय ज्यादा दर्द ना हो.

कैंसर का इलाज ( Cure For Cancer ) : कुछ साल पहले तक कैंसर को लाइलाज बिमारी माना जाता था किन्तु आयुर्वेद में इसका इलाज सबसे पहले गिलोय से ही प्राप्त हुआ था. गिलोय (Tinospara Cordifolia) का कैंसर में इस्तेमाल करने के लिए इसकी बेल की 8 इंच लम्बी एक डंडी, 7 पत्ते तुलसी, 5 पत्ते नीम और थोडा Wheat Grass लें. आप इन सबको अच्छी तरह से पीसकर काढ़ा निर्मित करें और इस काढ़े का दिन में दो बार सेवन करें. जल्द ही आपको कैंसर में आराम मिलेगा.

मधुमेह में लाभ ( Sugar / Diabetes ) : गिलोय मधुमेह के इलाज में आश्चर्यजनक लाभ पहुंचाता है. इसमें पायें जाने वाले तत्व खून से मिठास / शर्करा को खत्म करते है जिससे मधुमेह के संक्रमण का खतरा कम हो जाता है और रोगी निरोग रहता है.

हृदय रोग से बचाए ( Hearth Diseases ) : गिलोय (Tinospara Cordifolia) को एक रसायन के रूप में भी माना जाता है, एक ऐसा रासायन जो रक्त को शुद्ध करता है और खून को पतला रखता है ताकि हृदय से सम्बंधित किसी भी रोग की संभावना खत्म हो सके.

मलेरिया से बचाए ( Malaria ) : मौसम के बदलाव के साथ साथ मलेरिया का खतरा बढ़ जाता है. मलेरिया एक ऐसी बिमारी है जो अकेले नही आती बल्कि अपने साथ अनेक बीमारियों को साथ लाती है. इसमें सबसे अधिक कुनैन के दुष्प्रभाव का ख़तरा बना रहता है किन्तु गिलोय इस खतरे को नही पनपने देती इसीलिए मलेरिया के रोगी को गिलोय का इस्तेमाल करने की सलाह दी जाती है.

टीबी का इलाज ( Tuberculosis ) : टीबी रोग माइक्रोबैक्टीरियम ट्यूबरक्युल्म जैसे जीवाणुओं के कारण होता है जो खून के रास्ते शरीर को हानि पहुंचाते है. किन्तु गिलोय भी खून के जरिये ही इन सभी कीटाणुओं का नाश करके टीबी होने से बचाता है. ये इन जीवाणुओं को उन्ही की भाषा में जवाब देता है और इनपर आक्रमण कर इन्हें मुत्र के मार्ग से बाहर निकलने पर मजबूर कर देती है.

मोटापा दूर करे ( Fat / Obesity ) : ये रोग दिन प्रतिदिन बढ़ता चला जा रहा है. खुद रोगी भी अपने मोटापे से परेशान रहते है क्योकि इसकी वजह से वे अपना कोई भी कार्य करने में असक्षम होते है. साथ ही मोटापे की वजह से उनमे अन्य रोग भी उत्पन्न होने शुरू हो जाते है. किन्तु मोटापे के रोगियों को गिलोय को सुखाकर उसका चूर्ण निर्मित करना चाहियें और उसे त्रिफला के चूर्ण में मिलाकर शहद के साथ ग्रहण करना चाहियें.

मोटापे से छुटकारा पाने के लिए आप एक उपाय और भी कर सकते हो जिसके अनुसार आप हरद, बहेड़ा, आंवला और गीली को मिलाकर उसे अच्छी तरह गर्म कर लें और इसका काढ़ा तैयार कर लें. अब आप इस काढ़े को शिलाजीत के साथ पकाएं और ठंडा होने के बाद पी जाएँ. इस उपाय का नियमित रूप से सेवन शत प्रतिशत आपको मोटापे से मुक्ति दिलाता है.

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आँखों को लाभ ( Beneficial for Eyes ) : गिलोय के रस से आँखों की रोशनी में भी वृद्धि होती है, साथ ही आँखों से सम्बंधित रोग भी दूर होते है. इसके लिए गिलोय और आंवलें के रस को मिला लें और उसमे त्रिफला डाल लें. इसके बाद आप इसका काढ़ा निर्मित करें. काढा बनाने के बाद आप इसमें ऊपर से थोडा शहद और थोडा पीपल का चूर्ण भी मिला लें. तैयार काढ़े को आप नियमित रूप से सुबह और शाम ग्रहण करें और खुद आपनी आँखों की रोशनी में फर्क महसूस करें.

बुखार दूर करे ( Fever ) : गिलोय को बुखार के लिए सबसे उत्तम और सफल औषधि माना जाता है क्योकि ये पुराना या किसी रोग से उत्पन्न बुखार इत्यादि, हर तरह के बुखार से मुक्ति दिलाता है. बुखार में आराम पाने के लिए रोगी को 40 ग्राम गिलोय को पीसकर उसे मिटटी के बर्तन में रखना चाहियें. इस बर्तन रोगी ढककर रात भर के लिए छोड़ दें. अगले दिन इसे रोगी को मसलकर इसका रस छानना चाहियें और रोगी को इसे ग्रहण करना चाहियें. इस रस की 80 ग्राम मात्रा का दिन में 3 बार सेवन करने से रोगी को जल्द ही बुखार से आराम मिलता है.

गिलोय के रस को शहद में मिलाकर लेने से उस बुखार से भी मुक्ति मिलती है जिसके कारण का पता नही चल पाता. इसके अलावा इससे उल्टी, दस्त, खांसी जैसी बीमारियों से भी मुक्ति मिलती है.

गिलोय के रस का रोजाना सेवन करने से रोगी के शरीर में बुखार की वजह से आई कमजोरी भी दूर होती है और उसके शरीर में शक्ति का संचार होता है. जिससे वो जल्द ही ठीक हो जाता है.

बहुत से पेट के रोगों से मुक्ति दिलाये ( Control Stomach Diseases ) : गिलोय और शतावरी को सुखा लें और उसे अच्छी तरह से पीस लें. इस तरह उसका चूर्ण निर्मित हो जाता है. इस चूर्ण की 1 से 2 चम्मच को रोजाना पानी में उबालकर पकायें और एक काढा बनाएं और उसे पी जायें. इस उपाय को आप कुछ दिनों तक सुबह शाम लें. आपको पेट से सम्बंधित सभी रोगों से मुक्ति मिलती है.

खून की कमी पूरा करे ( Blood Deficiency ) : अनीमिया, शरीर में खून और खून में हीमोग्लोबिन की मात्रा के कम होने से व्यक्ति के शरीर में प्रतिरोधक क्षमता कम हो जाती है. किन्तु गिलोय के रस में शुद्ध देशी घी और शहद मिलाकर प्रतिदिन नियमित रूप से पीने से शरीर में खून की कमी दूर होती है और ये खून में हीमोग्लोबिन की मात्रा को बढाने में भी सहायक होता है जिसे खून की कमी जल्द ही दूर होती है.

पीलिया से मुक्ति दिलाये ( Jaundice ) : पीलिया रोग शरीर को तोड़ देता है, इस रोग से शरीर के अन्य जरूरी भाग जैसेकि पाचन तंत्र, किडनी, यकृत, आंते भी प्रभावित होती है, साथ ही व्यक्ति का शरीर और मुत्र पीले रंग का हो जाता है. ये एक भयंकर स्थिति होती है. किन्तु गिलोय को पीलिया रोग की मुक्ति के लिए भी लाभकारी माना जाता है. इसके लिए गिलोय को सुखाकर उसका चूर्ण बनाएं और 1 चम्मच चूर्ण में थोड़ी पीसी हुई काली मिर्च और त्रिफला मिला लें. इस मिश्रण में आप 1 चम्मच शहद मिलाएं और 1 ग्लास मुठ्ठे में मिलाकर प्रतिदिन सुबह शाम सेवन करें. इस तरह जल्द ही आपको पीलिया रोग से मुक्ति मिलती है.

कान दर्द दूर करे ( Pain in Ear ) : कान दर्द में रोगी को अत्यंत पीड़ा और कान में झनझनाहट महसूस होती है. जिसकी वजह से वो काफी परेशानी महसूस करता है और वे कान में कोई सींक इत्यादि डाल लेते है. जो उनके कान के पर्दों को हानि पहुंचाकर उन्हें बहरा कर सकती है. किन्तु अगर आप गिलोय के पत्तों के रस को गर्म पानी में उबालते हो और कुछ ठंडा होने पर उसे अपने कानों में डालते हो तो इससे आपके कान के दर्द में आराम मिलता है.

अगर आपके कान में मैल है तो आप गिलोय की बेल को पानी में घिस लें और उसे हल्का ग्राम करके सुबह शाम कानों में डालें. इस तरह आपके कान का मैल बाहर आ जाता है.

डेंगू और स्वाइन फ्लू से बचाए( Dengue and Swine Flu ) : डेंगू और स्वाइन फ्लू कुछ ऐसे रोग है जो वायरस की वजह से होते है ये निरंतर फैलते रहते है. पीछे दिनों जब स्वाइन फ्लू फैला था तो गिलोय ही सबसे पहले उपचार के रूप में सामने उपलब्ध हुआ था. वायरस के इन रोगों में शरीर के प्लेटलेट खत्म होने शुरू हो जाते है. जिससे रोगी की रोगों से लड़ने की शक्ति पूरी तरह खत्म हो जाती है और वो मृत्यु तक पहुँच जाता है. किन्तु अमृत मानी जाने वाली गिलोय के रस में पपीते के पत्तों का रस मिलाने से प्लेटलेट की मात्रा में तेजी से वृद्धि की जा सकती है. इसके लिए इस उपाय को दिन में 3 से 4 बार अपनाना चाहियें. ये डेंगू और स्वाइन फ्लू के साथ साथ चिकन गुनियां और बर्ड फ्लू जैसे रोगों का भी रामबाण इलाज माना जाता है.

नोट – इन सब बीमारियों के अलावा भी गिलोय को आप त्वचा की बिमारी, हिचकी, दस्त, गैस दूर करना, पेचिश, आंव, जोड़ों का दर्द, लीवर में बिमारी, झुर्रियां, मिर्गी, पित्त रोग, बवासीर, मुंहासें फोड़े फुंसी, शरीर का टूटना, असमय बुढापा, बाल जड़ना, काफ, गठिया, एलर्जी, मूत्र रोग और ना जाने कितने ही रोगों से मुक्ति मिलती है.

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