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गर्भावस्था सप्ताह दर सप्ताह 9 महीने का सफर

गर्भावस्था (Pregnancy) के दौरान महिलाओं के मन में बहुत सी शंकाएँ पैदा हो जाती है. अगर ये पहली बार है तो माँ का हाल पूछो ही मत. मन में बहुत डर उभर आते है. हमारे अंदर एक नया जीवन पनप रहा होता है. जिससे बहुत सी भावनाएं तथा दायित्व जुड़े होते है. हमारे शरीर में बहुत से शारीरिक तथा भावनात्मक परिवर्तन आते है. हम समझ ही नहीं पाते है की हमारे शरीर के साथ क्या हो रहा है. गर्भावस्था (Pregnancy) की प्रक्रिया से अनजान होने की वजह से गर्भवती महिला के दिमाग बहुत से ख्याल आते है कि आगे क्या होगा. इसी बात को सोचते हुए हम इस लेख में आपको बता रहे है कि गर्भावस्था (Pregnancy) के दौरान आप में क्या बदलाव आयेंगे. तथा किस स्तिथि में आपको क्या करना है. यहा पर हम आपको गर्भावस्था (Pregnancy) के विभिन्न चरणों के बारे में व्याख्यान कर रहे है. ताकि होने वाले माता तथा पिता को इस प्रक्रिया के बारे में पहले से ही जानकारी हो जाए. और वे डरने के बजाय इन सुखद क्षणों का आनन्द उठा सकें.

यहाँ पर हम इस प्रक्रिया को सप्ताह दर सप्ताह बता रहे है. तो चलिए जानते है कि आप गर्भावस्था (Pregnancy) के दौरान किन किन चरणों से होकर गुजरेंगी.

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गर्भावस्था सप्ताह दर सप्ताह 9 महीने

00-04 सप्ताह

यह वो समय है जब महिला के गर्भाशय में अंडा निषेचित होता है. निषेचन संभोग के माध्यम से अंडे का शुक्राणु के साथ होता मिलन है. इस प्रक्रिया से युग्मनज की पहली सेल बनती है जो बच्चे को जन्म जन्म देती है.गर्भावस्था

04-08 सप्ताह

यहाँ से गर्भावस्था (Pregnancy) का पहला लक्षण दिखाई पड़ता है. इस अवधि के दौरान, मतली, उल्टी, छाती में दर्द, नींद और थकान आम हैं. इन लक्षणों में से अधिकांश गर्भावस्था (Pregnancy) के दौरान शरीर में हार्मोनल परिवर्तन की वजह से होते हैं. इस समय चिकित्सक के साथ पहली मुलाकात होनी चाहिए. अल्ट्रासोनोग्राफी के माध्यम गर्भावस्था (Pregnancy) की थैली जहां भ्रूण है की जाँच की जाती है. इस समय भ्रूण 8 से 16 मिमी का होता है.

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08-12 सप्ताह

उपर बताये गये लक्षण 12वें सप्ताह तक बने रहते है. इस दौरान स्तन थोड़े सख्त तथा बढ़ना शुरु कर देते है. 10वें सप्ताह में भ्रूण ट्रंक, अंग और सिर के साथ मानव आकृति लेना शुरु कर देता है. अंगों का निर्माण अभी भी हो रहा है. पर इस समय बेबी माँ के पेट में हिलना ढुलना शुरु कर देता है. जिससे एक माँ को एक बहुत सुखद अनुभूति प्राप्त होती है.

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12-16 सप्ताह

आखिरकार माँ के खुश होने के दिन आ गये. क्योंकि शुरु में जो मतली, उल्टी, छाती में दर्द, नींद और थकान के लक्षण आये थे वो सब अब खत्म होने जा रहे है. यह बढ़ते हुए पेट को देखकर आनंद लेने का समय है. इस समय यह अभी भी छोटा है, लेकिन यह बड़ा होने की शुरुआत है. आप ख सकती है कि गर्भावस्था (Pregnancy) पूरी परगति पर है. भ्रूण बड़ी तेजी से बढ़ रहा है. इस समय सिर शरीर से थोडा बड़ा होता है. पलकें, नाखूनों, उंगलियों, मूत्र प्रणाली का गठन होता है. इस प्रक्रिया के दौरान माँ के शरीर से बहुत अधिक उर्जा की जरूरत होती है. जो भी भोजन हम खाते है सब कुछ भ्रूण के द्वारा चूसा जाता है. इसलिए इस समय ये जरूरी है कि माँ को संतुलित भोजन करना चाहिए.
फल, सब्जियों के साथ ऐसे खाद्य पदार्थों का सेवन करना चाहिए जो आयरन (Iron) के स्रोत हैं. अगर ऐसा संभव न हो पा रहा हो तो आयरन के कैप्सूल भी लिए जा सकते है.गर्भावस्था

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16-20 सप्ताह

अब परेशान करने वाले मतली वाले दिन समाप्त हो चुके है. अब आपकी डाइट बढ़ाने का समय है क्योंकि आप दो लोगो के लिए भोजन कर रही है. इसलिए इस दौरान थोड़े थोड़े समय पर खाते रहना चाहिए. वसायुक्त और शक्करयुक्त खाद्य पदार्थों से बचें. अपने आहार में बहुत अधिक तरल सेवन करें. भ्रूण के बाल बढ़ने लगते हैं, सभी अंगों पूरा हो चुके है, लेकिन अभी भी अपरिपक्व हैं. पहले से उसने अंगूठा चुसना शुरु कर दिया है. इस समय यह 20 cm लम्बा तथा इसका वजन 350 ग्राम है.गर्भावस्था

20-24 सप्ताह

इस समय एक प्रमुख टेस्ट मोर्फोलोगिकल अल्ट्रासोनोग्राफी किया जाता है. यह बच्चे के शरीर में किसी प्रकार की विकृति का पता करने के लिए किया जाता है. इस अवस्था में पेट पहले से ही पूरी तरह से दिखाई दे रहा है और गर्भाशय नाभि तक फैली हुई है. भ्रूण नींद चक्र शुरू कर देता है. सिर पहले की तुलना में शरीर के अनुपात में आ जाता है. पहली बार सिर पर बाल दिखाई देते है. 24 वें सप्ताह के अंत तक यह 600g वजन का होता है.

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24-28 सप्ताह

इस समय मधुमेह की जांच के लिए खून का टेस्ट करवाना चाहिए. अगर सब कुछ ठीक है तो आगे का समय बहुत अच्छा निकलने वाला है. पेट पहले से बहुत अधिक बढ़ चूका है. बच्चे के हिलने दुलने के निशान साफ दिखाई देते है. इस समय माँ को बायीं तरफ करवट लेकर सोना चाहिए ताकि बच्चे को साँस लेने में आसानी रहे जो पहले से ही सुन (hear) रहा है, छू (touch) रहा है, सूंघ (smell) रहा है तथा स्वाद (taste) ले रहा है. इस समय माँ तथा बच्चे का वजन बढ़ जाता है. 28 वें सप्ताह के अंत तक भ्रूण 1 किलो वजन का हो जाता है.

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28-32 सप्ताह

गर्भवती महिला में कमरदर्द (backpain), टांगो में सुजन (swalown legs), तथा कब्ज जैसे लक्षण आ जाते जी. ये सब निचे दिए गये कुछ कारणों की वजह से होता है.

  • पेट का वजन रीढ़ की हड्डी पर पड़ने से
  • गर्भाशय में हुई वृद्धि के कारण रक्त परिसंचरण का मुश्किल होना
  • गर्भावस्था (Pregnancy) हार्मोन की कार्रवाई के कारण

इस समय भ्रूण पेट में उल्टा हो जाता है. उसके अंग पहले से अधिक परिपक्कव हो जाते है.  32 वें सप्ताह के अंत तक यह 2 किलो वजन का हो जाता है.

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32-36 सप्ताह

इस समय पेट बहुत अधिक बढ़ जाता है. सोने तथा घुमने में बहुत परेशानी होती है. गैस के कारण बार बार सीने में जलन की समस्या होती है. इससे बचने के लिए आपको वसा युक्त तथा एसिडिटी बढ़ाने वाले भोजन अपनी मेनू से हटा देने चाहिए. भोजन के तुरंत बाद न लेटने से भी आराम मिलता है. इस समय बच्चा माँ बाप की आवाज पहचानना शुरु कर देता है. 38 वें सप्ताह के अंत तक यह 3 किलो वजन का हो जाता है.

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36-40 सप्ताह

भ्रूण से सम्बंधित हर चीज अब पूरी हो चुकी है. वह अब जन्म के लिए तैयार है. अंग पूरी तरह विकसित हो चुके है. आकार बढ़ने से पेट के अंदर जगह काम होने के कारण हिलना डुलना कम हो जाता है. हर सप्ताह डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए. 37 वे हफ्ते से बच्चा पैदा हो सकता है. हर 5-10 मिनट के संकुचन के लक्षण डॉक्टर को बता देने चाहिए. गर्भावस्था (Pregnancy) की थैली के फटने के कारण योनि से खून बह सकता है.

 

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