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आक का दूध पैर के अगुंठे पर लगाने से आँख का दर्द चुटकी में गायब

आक (Calotropis Gigantea) का वृक्ष प्राय: सम्पूर्ण भारत में पाया जाता है. इसकी ऊँचाई आठ से दस फीट तक होती है. यह उष्ण और शुष्क जमीन पर उगता है. जो बंजर होती है. इसके पत्ते हरे और मोटे आयताकार होते हैं. ये चार इंच लम्बे और दो इंच चौड़े होते हैं. इसके फूल सफेद गंधहीन होते हैं. फल 2-3 इंच लम्बे और मुड़े हुए होते हैं. इसके बीज महीन रेशम के समान गुच्छेदार रूई से युक्त छोटे और चपटे होते हैं. इसकी डालियों और पत्तों को तोड़ने पर दूध निकलता है. जिसका आखों में पड़ना घातक होता है. आक दो तरह का होता है. 1- श्वेतार्क और 2- रक्तार्क

रक्तार्क के पेड़ कम ऊँचे होते हैं. इसके पत्ते भी श्वेतार्क के पत्तों से छोटे होते हैं. और इसके फूलों में हल्की खुशबू होती है. दलखंडों के ऊपरी भाग पर जमुनी रंग पाया जाता है. इन दोनों के बीज तथा रूई में समानता पाई जाती है. रक्तविकार, कुष्ठ, उपदंश, या किसी अन्य कारण से उत्पन्न वर्णों में आंतरिक और बाहरी प्रयोग किया जाता है. इसकी छाल का प्रयोग नीम के तेल के साथ कई प्रकार के चर्म रोगों में किया जाता है.

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श्वेतार्क का पेड़ ज्यादा ऊँचा होता है. इसके पत्ते रक्तार्क से ज्यादा कोमल और हरे होते हैं. ओस इसके फूल सफेद और बड़े तथा सुंदर होते हैं इसे गणेश जी का रूप माना जाता है कहते हैं की इसकी जड़ में गणेश जी का वास होता है. उसी को श्वेतार्क गणपती कहते हैं. इस आक को अपने घर के बाहर लगाना बहुत शुभ माना जाता है.आक का दूध पैर के अगुंठे पर लगाने से आँख का दर्द चुटकी में गायब

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आक (Calotropis Gigantea) परिचय गुण तथा आयुर्वेदिक उपयोग

आक का दूध पैर के अगुंठे पर लगाने से आँख का दर्द चुटकी में गायब – आक या आकड़ा या मदार का दूध कभी भी हमे सीधे अपनी आँखों पर नहीं लगाना चाहिए. क्योंकि यह बहुत जहरीला होता है. यह पर हम आपको आक का एक बहुत ही नायाब नुस्खा बताने जा रहे है. अगर कभी आपकी दाई आँख दुःख रही हो तो बाएँ पैर के नाख़ूनों पर तथा बाई आँख दुःख रही हो तो दाएँ पैर के नाखूनों को आक के दूध से तर कर दे. फिर देखो चमत्कार आँख का दर्द पलक झपकते ही गायब हो जायेगा.

आक (Calotropis Gigantea) कई नामों से जाना जाता है. जैसे- आर्क, आक, मदार, आकवन, आकदी, चिट्टू, अकुआ आदि.

आक (Calotropis Gigantea) के आयुर्वेदिक उपयोग

दर्द में- चोट, मोच के दर्द में इसके दूध में नमक मिला कर लेप करने से दर्द कम हो जाता है. एक बात का ध्यान रखें दूध की मात्रा कम ही हो क्यूँ की ज्यादा होने पर इससे छाला भी पड सकता है.

पुरानी चोट के दर्द में– ऐसी चोट जिस में दर्द रहता हो उस पर आक के पत्तों पर अरंडी का तेल लगा कर उन को सेक कर लगाने से दर्द समाप्त हो जाता है. ऐसा तीन से चार दिन करना चाहिए.

बच्चों के पेट फूलने पर– किसी भी कारण से अगर बच्चों का पेट फूल गया है. तो आक के पत्तों पर अरंड का तेल लगा कर और इनको सेक कर पेट पर पट्टी के रूप में बाँधें इससे बच्चे को एक दस्त आएगा और पेट ठीक हो जायेगा.

बबासीर में- आक के पाँच कोमल पत्ते ले कर उन पर नमक लगा कर साथ ही तेल लगा कर इन पत्तों को लकड़ी की आग में जला दें. फिर इन की राख को निकल कर रख लें और रोज 2 चुटकी सेवन करने से 15 दिन के बाद बादी बबासीर ठीक हो जाता है.

विष पर- विच्छू के काटने पर इस स्थान पर आक का दूध लगाने से दाह और दर्द दोनों ही समाप्त होते हैं.

सूजन पर- आक की जड़ तथा नीम कई छाल को पानी में घिस कर लगाने से सूजन कम हो जाती है.

कुष्ठ होने पर- कुष्ठ होने पर आक की जड़ को सुखा कर इसका चूर्ण बना कर रोज शहद के साथ लेने से

आराम आता है.

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