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अगस्त का पेड़ (Sesbane) जकडन उदर विकार सुजन में उपयोगी

अगस्त का पेड़ (Sesbane) मध्यम आकार का पौधा होता है. जिसकी ऊँचाई बीस फीट की होती है. इसकी डालियाँ घनी होती है. प्राय भारत के सभी प्रान्तों में ये होता है. बाग़ बगीचों और सडकों के किनारे इसे आसानी से देखा जा सकता है. पुष्प के आधार पर ये दो प्रकार के होते हैं. (सफेद ) और (लाल ) इन पर कुछी समय बाद फूल और फल आने लगते हैं.

इसके फलों की लम्बाई एक हाथ तक लम्बी होती है. जिनका आकार सेम की तरह चपटा होता है. जब ये कच्चे होते हैं तब इन का साग बनाया जाता है. इसके फूलों की भी सब्जी बनाई जाती है. कहीं-कहीं इसका पीला व नीला फूल भी पाया जाता है. बंगाल में यह बहुताय पाया जाता है. इसकी लकड़ी कमजोर होने के कारण इसका शिर्फ़ ईधन के रूप में प्रयोग होता है.अगस्त का पेड़ (Sesbane) जकडन उदर विकार सुजन में उपयोगी

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अगस्त का पेड़ (Sesbane) जकडन उदर विकार सुजन में उपयोगी

अगस्त (Sesbane) के पेड़ के अन्य नाम

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इसे और भी नामों से जाना जाता है. जैसे- मुनीपुष्प, मुन्दिम, अगस्तिया,हथिया, अग्थिया, वक, अगस्त, ह्र्दगा, अगथिओ, अविसी आदि कहते हैं.

अगस्त (Sesbane) के पेड़ के आयुर्वेदिक उपयोग

शोथरोग में- अगस्त के बीज और धतूरे के बीज को समान मात्रा में ले कर इन को पीस कर इनका लेप करने से शोथ रोग ठीक हो जाता है.

सर्दी में- सर्दी के कारण नाक बंद होने, सिर भारी होने पर इसके पत्तों का रस दो बूंद नाक में टपकाना चाहिए.

जकड़न में- लाल अगस्त की जड़ को पान के साथ खाने से सरीर की जकड़न ठीक हो जाती है.

उदर विकार में- इसके पत्तों का रस पीना उदर विकार को ठीक करता है.

सूजन में- धतूरे की जड़ और लाल अगस्त की जड़ दोनों को ठंडे पानी में पीस कर उसे सूजन पर लगाने से आराम मिलता है.

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