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अगर (Eagle Wood) नपुंसकता दमा गठिया अनगिनत रोगों का इलाज

अगर (Eagle Wood) का वृक्ष विशाल पेड़ों की श्रंखला में आता है. भारत में इस आसाम प्रान्त के श्री हाटा क्षेत्र के इलाकों में अधिक देखा जाता है. अन्य जगहों पर ये चीन के चतीया प्रदेश में या सिल्हट जिले के आस-पास जटिया पर्वत पर भी देखा जा सकता है. इसकी मुख्य खासियत यह होती है. की इस पर पतझड़ का कोई असर नहीं होता है. एवं यह हमेंशा हर-भरा रहता है. इस पर फूल प्राय चैत्र मॉस के प्रारम्भ में लगते हैं. तथा बीजों के पकने का समय सावन मास के अंत में होता है.

इसकी लकड़ी कमजोर और लचीली होती है. छिद्द्र नुमा संरचना में खुसबूदार राल के समान कोमल पदार्थ भरा होता है.  इसको भी अनेक नाम से जाना जाता है. जैसे- स्वदगरू, अगरू, आकेला, कस्बे, बवा, उद्गरकी आदि इसका उपयोग इत्र बनाने या अगरबत्तियां बनाने के काम में किया जाता है. आयुर्वेद ग्रन्थ के अनुसार इसकी पांच जातियां होती हैं.

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1-क्रष्णगरू 2- कषागरू, 3- दाहागरू 4- स्वादूगरू 5- मंगलागरूअगर (Eagle Wood) नपुंसकता दमा गठिया अनगिनत रोगों का इलाज

अगर (Eagle Wood) नपुंसकता दमा गठिया अनगिनत रोगों का इलाज

अगर (Eagle Wood) के अन्य नाम

संस्कृत – अगरू, हिंदी – अगर , बंगला – अगर, मराठी – अगर, कर्नाटकी – अगर, तामिल – अगर, गुजराती – अगरू , तेलगू – अगरू चेट्टु , मलयालम – आकेल, फारसी – कसबेबवा , अरबी – ऊदगर, ग्रीक – अगेलोकन, लैटिन – एक्कीलेरिया एगेलोचा
अंग्रेजी – ईगलबुड, अगरबुड

अगर (Eagle Wood) के आयुर्वेदिक उपयोग  

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त्वचा रोग – अगर का लेप करना त्वचा रोग में लाभदायक है.
जलन – अगर का चूर्ण शरीर पर लगाने से जलन में लाभ मिलता है.
बुखार में पसीना आना – अगर, चंदन और नागकेसर का चूर्ण करके बेर की छाल के पानी में उबालकर शरीर पर लेप करना चाहिए.
शरीर को सुगन्धित करना – अगर, कपूर, केसर, लोहबान, खस, लोध, कालीखस और नागरमोथा को बराबर मात्रा में लेकर बारीक पीसें. इसे शरीर पर मलने से शरीर सुगन्धित हो जाता है.
दमा, श्वास रोग – अगर का इत्र 1 से 2 बूंद पान में डालकर खिलाने से तमक श्वास से छुटकारा मिल जाता है.
बुखार – *अगर और ओगातावर को बराबर मात्रा में पीसकर काढ़ा बनाकर सेवन करने से बुखार समाप्त होता है.
*अगर को बारीक पीसकर पानी के साथ फांक के रूप में लेने बुखार उतर जाता है.
खांसी – बच्चों की खांसी में अगर और ईश्वर मूल (ईश्वर की जड़) को पीसकर सीने पर लेप करने से आराम होता है.
पुरानी खांसी – अगर का बुरादा 1 ग्राम लेकर 6 ग्राम शहद के साथ सुबह-शाम सेवन करने से पुरानी खांसी नष्ट हो जाती है.
वमन (उल्टी) – *अगर को पानी में घिसकर पिलाने से उल्टी होना बंद हो जाती है.
*अगर के रस में शक्कर मिलाकर गुनगुना करके पीने से उल्टी होना बंद हो जाती है.”
नंपुसकता – *अगर का पुराना सेंट 1 से 2 बूंद को पान में डालकर खाने से बाजीकरण होता है और नपुंसकता दूर होती है.
*अगर का चोया, पान में मिलाकर खाने से नामर्दी में लाभ होता है.”
हिचकी का रोग – लगभग 2 ग्राम से लगभग आधा ग्राम ´´अगर´´ को सुबह-शाम शहद के साथ चटने से हिचकी नहीं आती है.
दस्त – अगर की लगभग आधा ग्राम से लेकर लगभग2 ग्राम की मात्रा में लेकर शहद के साथ दिन में दो बार (सुबह और शाम) पीने से दस्त का आना बंद हो जाता है.
प्यास अधिक लगना – बुखार होने पर रोगी को बार-बार प्यास लगता हो तो अगर का काढ़ा बनाकर पिलाने से प्यास से आराम मिलता है.
जोड़ों (गठिया) – गठिया के रोगी को दर्द वाले स्थानों पर अगर की गोंद का लेप करने से लाभ मिलता है तथा रोग खत्म होता है.
फोड़ा (सिर का फोड़ा) – पानी में अगर को घिसकर फोड़े पर लगाने से फोड़ा ठीक हो जाता है.
चालविभ्रम (कलाया खन्ज) – लगभग 1 ग्राम का चौथा भाग अगर रोजाना सुबह-शाम सेवन करने से रोगी को लाभ मिलता है.
उरूस्तम्भ (जांघ का सुन्न होना) – सोंठ और अगर को बराबर मात्रा में लेकर उसका काढ़ा बनाकर पीने से जांघ का सुन्न होना दूर हो जाता है तथा शरीर के अन्य अंगों का सुन्न होना भी दूर हो जाता है.
शरीर का सुन्न पड़ जाना – सोंठ और अगर को बराबर मात्रा में लेकर उसका काढ़ा बना लें. इसका काढ़ा को पीने से शरीर का सुन्न होना दूर हो जाता है.
खाज-खुजली और चेहरे के दाग – अगर को पानी के साथ पीसकर शरीर में लगाने से खाज-खुजली दूर हो जाती है.
गज चर्म – अगर´ को पानी में घिसकर त्वचा कीसूजन पर लगाने से जलन और त्वचा के दूसरे रोग ठीक हो जाते हैं. गजचर्म (त्वचा का सूज कर बहुत मोटा और सख्त हो जाना) में भी यह लाभकारीहै. यदि किसी भी कारण से त्वचा में जलन होकर लाल हो जाए तो `अगर´ को पानी में घिसकर लगाने से आराम आ जाता है.
नाड़ी की जलन – नाड़ी की जलन को खत्म करने केलिए अगर को पीसकर लेप बनाकर लेप करने से लाभ होता है.

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